Friday, 25 September 2020

वो चोर मर गया।


मैं एक साधु का जीवन पढ़ता था। एक झेन फकीर हुआ। 

वह चोर था साधु होने के पहले। एक महल से चोरी करके भागा। पुलिस उसके पीछे है; लोग उसको पकड़ने आ रहे हैं। कोई उपाय न देखकर, कोई मार्ग न देखकर, वह एक बुद्ध मंदिर में प्रवेश कर गया। सुबह कोई चार बजे रात का समय था। कोई भिक्षु सोया था, उसके कपड़े टंगे थे। उसने भिक्षु के कपड़े पहन लिए और मंदिर में हाथ—पालथी मारकर बुद्धासन में बैठ गया। नमो बुद्धाय, नमो बुद्धाय का मंत्र जाप करने लगा।

सिपाही भागे हुए मंदिर के पीछे आए। वे उसका पीछा कर रहे थे। लेकिन वहा एक साधु बैठा है, नमो बुद्धाय का पवित्र मंत्र गज रहा है। वहां कोई चोर नहीं। वे सिपाही उसके चरणों में झुके, उसको नमस्कार किए; और कहा, साधु महाराज, यहां कोई चोर तो नहीं आया?

जब वे उसके चरणों में झुके, तब उसे बड़ी हैरानी हुई। और एक क्रांति हो गई। उसे लगा कि मैं एक झूठा साधु! और झूठी साधुता में इतना बल—झूठी साधुता में—कि जो मेरी हत्या करने मेरे पीछे लगे थे, वे मेरे चरणों में झुक गए! अगर झूठी साधुता में इतना बल है, तो सच्ची साधुता में कितना बल होगा!

उसने उन सिपाहियों से कहा कि चोर आया था, लेकिन अब तुम उसे खोज न पाओगे। वह चोर मर चुका। वे सिपाही बोले, हम समझे नहीं! आप रहस्य की बातें न करें। हम सीधे—सादे लोग। हम समझे नहीं आपका मतलब! चोर कहां है? कैसे मर गया?

उस साधु ने कहा, मैं ही था वह चोर, लेकिन अब मैं मर चुका हूं। और वह चोर अब तुम्हें कहीं भी नहीं मिलेगा। वह नहीं है अब। तुमने मेरे चरणों में झुककर उसकी हत्या कर दी। तुम गोली से उसे नहीं मार सकते थे, लेकिन तुमने उसे मार दिया। और जब झूठी साधुता में इतना अर्थ हो सकता है, तो मैं अब उस साधुता की तलाश करूंगा, जो सच्ची है।

वह एक बड़ा झेन फकीर हो गया। वह सदा यह घटना लोगों से कहा करता था कि मैं कोई साधु बनने नहीं आया था, परिस्थिति ने सत्व का उदय कर दिया। नमो बुद्धाय! सुबह का सूना मंदिर, मंदिर की दीवारों में गूंजता नमो बुद्धाय का मंत्र; मूर्ति के पास से उठती हुई धूप, सुगंधित वातावरण, सिपाहियों का आना और मेरे चरणों में झुक जाना—मेरी सारी ऊर्जा सत्य से बह गई। एक क्षण को मुझे सत्य का अनुभव हुआ कि साधुता का सुख, साधुता की सुगंध, साधुता का फूल क्या है।

आप पूरे समय बदल रहे हैं। इसलिए अच्छे आदमी के पास आप अच्छे आदमी हो जाते हैं। बुरे आदमी के पास आप बुरे आदमी हो जाते हैं। अगर सक्रिय लोगों के बीच में पड़ जाएं, तो आप सक्रिय हो जाते हैं। अगर आलसियों के बीच में पड़ जाएं, तो आपको नींद आने लगती है।

ओशो, गीता-दर्शन-७/१४

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