Thursday, 10 September 2020

प्रभु की खोज।


"खोज में ही बडा प्रसन्न हु "

"एक दिन घटेगी समाधि 
एक दिन घटेगा बुद्धत्व ।"-  #स्वामी अनंत श्री 

रविन्द्रनाथ की एक प्रसिद्ध रचना है ।
एसी ही भावदशा में गुजरे होंगे ।
परमात्मा को खोजने नीकले है, यहाँ वहाँ ढूँढते ढूँढते, ढूँढते, टटोलते, पूछते-पाछते,,घूमते फिरते है, कहीं परमात्मा का घर मिल जाए।
और,
सौभाग्य से कूछ मार्गदर्शक मिल जाते है, जो बताते हैं कि यहीं परमात्मा का घर है ।
रविन्द्रनाथ लिखते हैं कि, में दबे पाँव 
सीढियों पर चढ़ते हुए, 
एक सुन्दर भवन में पहोंच गया ।
द्वार पर खडा होकर पूरी प्रतीत होती हैं की, 
अंदर है उसकी खोज में पूरा जीवन भटकता रहा ।
हाथ ऊपर ऊठाता है और साॅकल खटखटाने के लिए सोचता है ।
सोचता है,,
अगर वो आ गये तो?
मिलेंगे, 
क्या कहेंगे?
सोचते हैं, 
'ऊसकी खोज में जो इतना आनंद है,उस आनंद को गॅवाना नही है '
रविन्द्रनाथ कहते हैं, 
"और में पीछे पलटता हुं।दबे पाँव वापस लौटता हूँ ।और अब में ऊसे ढूँढते घूम रहा हूँ।जानता हूँ की घर कहाँ है।मुझे खटखटाना नहीं है।मुझे खोज में ही बडा आनंद आता है।"
      -  यही सब आध्यात्मिक लोगों की भावदशा है।
  हे परमात्मा 🙏
     में तेरी खोज में ही बडा प्रसन्न हु ।

No comments:

Post a Comment