ताओ उपनिषाद (प्रवचन-10)
भरे पेट और खाली मन का राज....
एक बहुत प्रसिद्ध कथा है जूडो की। एक बहुत बड़ा तलवारबाज/ सोर्ड्समैन है। वह इतना बड़ा तलवारबाज है कि जापान में उसका कोई मुकाबला नहीं है। एक रात वह दो बजे अपने घर लौटा है। जब वह अपने बिस्तर पर लेटने लगा, तो उसने देखा, एक दीवार से बड़ा चूहा निकला है। उसे बड़ा क्रोध आया। उसने चूहे को डराने-धमकाने की कोशिश की अपने बिस्तर पर से ही, लेकिन चूहा अपनी जगह पर बैठा रहा। उसे बड़ी हैरानी हुई। वह बड़े-बड़े लोगों को धमका दे, तो भाग खड़े होते हैं! चूहा! उसको इतना क्रोध आ गया कि उसके पास में ही सीखने के लिए रखी लकड़ीे की तलवार उठा ली और जोर से चूहे पर हमला किया। हमला उसने इतने क्रोध में किया, चूहा जरा इंच भर सरक गया। उसकी तलवार जमीन पर पड़ी और टुकड़े-टुकड़े हो गई और चूहा अपनी जगह बैठा रहा। तब जरा उसे घबराहट पैदा हो गई। चूहा कोई साधारण नहीं मालूम होता। उसके वार को चूक जाना, इसकी कल्पना भी नहीं थी।
वह अपनी असली तलवार लेकर आ गया। लेकिन जब चूहे को मारने के लिए कोई असली तलवार लेकर आता है, तो उसकी हार निश्चित है। चूहे से डर तो गया वह बहुत और चूहा असाधारण है। हाथ उसका कंपने लगा। और उसे लगा कि अगर असली तलवार टूट गई, तो फिर इस अपमान को सुधारने का कोई उपाय न रह जाएगा। उसने बहुत सम्हल कर मारा। और जो जानते हैं, वे कहते हैं, जितना सम्हल कर आप निशाना लगाएंगे, उतना ही चूक जाएगा। क्योंकि सम्हलने का मतलब है कि भीतर डर है, भीतर घबड़ाहट है, कंपन है। अगर भीतर कोई डर या घबड़ाहट न हो तो आदमी सम्हल कर काम नहीं करता। काम करता और है, हो और जाता है। उसने तलवार मारी उसे। एक क्षण उसका हाथ बीच में कंपा और जब तलवार नीचे पड़ी, तो टुकड़े-टुकड़े हो गई। चूहा फिर जरा सा हट गया था।
उस तलवारबाज की समझ के बाहर हो गई बात। उसने होश खो दिया। उसने गांव में खबर की कि किसी के पास बिल्ली हो, तो ले आओ। दूसरे दिन गांव के एक धनपति ने अपनी बिल्ली भेजी। वह कई चूहों को मार चुकी थी। लेकिन तलवारबाज डरा हुआ था और जिस धनपति ने बिल्ली भेजी थी, वह भी डरा हुआ था। क्योंकि जब तलवारबाज की तलवार टूट गई हो, तो बिल्ली कहां तक सफल होगी?उधर बिल्ली को भी खबर मिल गई थी। बिल्ली ने बहुत चूहे मारे थे, लेकिन इस चूहे से आतंकित हो गई थी। रात भर सो न पाई। सुबह जब चली, तो पूरी तैयारी से चली। रास्ते में पच्चीस योजनाएं बनाईं। कभी-कभी उसके मन को भी हुआ, मैं यह क्या कर रही हूं! चूहे तो मुझे देखते ही भाग जाते हैं और मैं योजना कर रही हूं? लेकिन योजना कर लेनी उचित थी, चूहा असाधारण मालूम होता था।
बिल्ली दरवाजे पर आई। उसने भीतर देखा तो चूहे को देखकर कंप गई। चूहा बैठा था। तलवार टुकड़े-टुकड़े पड़ोस में पड़ी थी। इसके पहले कि बिल्ली आगे बढ़े, चूहा आगे बढ़ा। बिल्ली ने बहुत चूहे देखे थे। लेकिन कोई चूहा बिल्ली को देख कर आगे बढ़ेगा! बिल्ली एकदम बाहर हो गई।
तलवारबाज की हिम्मत बिलकुल टूट गई कि अब क्या होगा! सम्राट को खबर की गई कि आपके राजमहल की बिल्ली भेज दी जाए, अब कोई और उपाय नहीं है। सम्राट के पास जो बिल्ली थी, वह निश्चित ही देश की श्रेष्ठतम, कुशल बिल्ली थी। लेकिन वही हुआ जो होना था। सम्राट की बिल्ली ने चलते वक्त सम्राट से कहा, आपको शर्म आनी चाहिए, ऐसे छोटे-मोटे चूहों को मारने को मुझे भेजते हैं। मैं कोई साधारण बिल्ली नहीं हूं!
लेकिन उसने भी यह अपनी रक्षा के लिए कहा था। खबर पहुंच गई कि चूहा आगे बढ़ा और बिल्ली वापस लौट गई, कि तलवार टूट गई, योद्धा हार गया है, कि चूहे का आतंक पूरे गांव पर छाया हुआ है, चूहा साधारण नहीं है। लेकिन बचाव के लिए उसने राजा से कहा कि इस साधारण से चूहे के लिए आप मुझे भेजते हैं? सम्राट ने कहा, चूहा साधारण नहीं है। और आतंकित मैं भी हूं कि तू लौट तो न आएगी!
और जो होना था, वही हुआ। बिल्ली गई और उसने जोर से झपट्टा मारा। लेकिन चूक गई। दीवार से उसका मुंह टकराया, लहूलुहान होकर वापस लौट गई। चूहा अपनी जगह था
गांव में एक फकीर के पास भी एक बिल्ली थी। सम्राट की बिल्ली ने कहा कि अब और कुछ रास्ता नहीं है, उस फकीर के पास जो बिल्ली है, वो हम सब की गुरु है और जिससे हमने कला सीखी है। वह मास्टर कैट थी। उस बिल्ली को बुलाया गया। सारे गांव की बिल्लियां इकट्ठी हो गईं, क्योंकि यह चमत्कार का मामला था। अगर फकीर की बिल्ली हार ती है, तो फिर बिल्ली सदा के लिए चूहों से हार जाएगी।
चूहा अपनी जगह बैठा था। फकीर की बिल्ली जब भीतर जाने लगी, तो सभी बिल्लियों ने सलाह दी कि देखो ऐसा करना, कि वैसा करना। फकीर की बिल्ली ने कहा, मूर्खो, अगर योजना बनाओगी चूहे को पकड़ने की, तो चूहे को कभी न पकड़ पाओगी। क्योंकि जिस बिल्ली ने योजना बनाई, वह हार गई। योजना बनाने का मतलब ही यह है कि चूहे से डर गए तुम। चूहा ही है न! पकड़ लेंगे। पकड़ ने में किसी कला की जरूरत नहीं है, बिल्ली होना ही हमारी कला है। हम पकड़ लेंगे।
योद्धा ने भी कहा कि थोड़ा सोच लो, अगर तू भी लौट गई, तो मुझे घर छोड़ कर भागना पड़ेगा। क्योंकि इस कमरे के भीतर मैं अब नहीं जा सकता। उस चूहे को देखना भी ठीक नहीं है अब। वह वहीं बैठा है अपनी जगह पर। उस बिल्ली ने कहा, ये भी कोई बात हैं! सब शांत रहें।
वह बिल्ली भीतर गई और चूहे को पकड़ कर बाहर आ गई। बिल्लियों की भीड़ लग गई। उन सब ने पूछा कि चूहे को तुमने पकड़ा कैसे? क्या है तरकीब? उस बिल्ली ने कहा, मेरा बिल्ली होना काफी है। मैं बिल्ली हूं और यह चूहा है। चूहे सदा कोआपरेट/ सहयोग करते रहे। बिल्लियां सदा पकड़ती रहीं। यह हम दोनों का स्वभाव है, यह पकड़ा जाए गा और मैं पकड़ लूंगी। तुमने योजना बनाई, इसी से भूल हो गई। तुम बुद्धि को बीच में लाए,
इसी से परेशान हुए।
झेन फकीर इस कहानी को सैकड़ों साल से कहते रहे हैं। यह बिल्ली गरीब फकीर की बिल्ली थी। सम्राट की बिल्ली के बराबर न इसके पास शरीर था, न ताकत थी। इसके हाथ में तलवार भी न थी। यह साधारण बिल्ली थी। पर उस बिल्ली ने कहा कि मेरा स्वभाव, यह चूहे का स्वभाव, इसमें कोई अनहोना नहीं हुआ है।
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