*समस्त जगत के प्रति मंगल की भावना*
*आपको भीतर के हर द्वंद और संघर्ष से मुक्त करती है।*
*जिन लोगो ने कभी जीवन को जाना या कभी भी कोई जीवन को जानेगा, तो एक बहुत कीमती बहमूल्य सूत्र उसे दिखाई पड़ेगा।* और वह यह कि अगर मैं सारे जगत को प्रेम कर सकूं, तो जगत से मेरे सारे द्वंद, मेरे सारे संघर्ष विलीन हो जाएंगे। दूसरे व्यक्ति से मेरे संघर्ष की शरुआत वहां है जहां दूसरे व्यक्ति से मेरा प्रेम कम पड़ जाता है। जब भी हम जगत से प्रेम के अलावा किसी दूसरी चीज से संबंधित होते है, तभी जगत एक उपद्रव, तभी जगत एक संघर्ष और कलह का रूप ले लेता है। जब भी मैं प्रेम के अतिरिक्त किसी और मार्ग से किसी भी व्यक्ति से संबंधित हो जाऊंगा, तभी मेरे भीतर वे संबंध अनेक प्रकार के द्वंद, अनेक प्रकार के उत्ताप, अनेक प्रकार की कलह को, अनेक प्रकार के मानसिक संघर्ष और तनाव को पैदा करेंगें। मनुष्य के भीतर धृणा से ज्यादा, हिंसा से ज्यादा क्रोध से ज्यादा और कोई चीज द्वंद और कोई चीज द्वंद और धुंए को पैदा नहीं करती।
*जीन लोगों को सत्य को जानना हो, जिन लोगों को निज सत्ता को अनुभव करना हो, या जिन्हें पदार्थ के पार के अदृश्य लोग की अनुभूति में प्रतिष्ठित होना हो, उनके लिए प्रेम के अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है।*
ओशो
प्रेम को प्रार्थना बनाओ
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