Friday, 29 January 2021

गुरजिएफ़*

*गुरजिएफ़*
गुर्जीएफ ने प्रबुद्ध होनेके लिए चार टूल्स दिए है । उस में का पहला टूल है, "सेल्फ रीमेंबरिंग" (Self Remembering)
"मैं हूँ " गुरजिएफ का अद्भुत प्रयोग 
 गुरजिएफ कहा कि , तुम जो भी करो उस में खुद को याद रखो कि मैं हूं। तुम पानी पीते हो, तुम भोजन करते हो; सब में सदा याद रखो कि मैं हूं। खाए जाओ और याद रखो कि मैं हूं। इसे भूलो मत।
यह स्मरण कठिन होगा। तुम सोचते हो कि मैं तो जानता ही हूं कि मैं हूं इसे याद रखने की क्या जरूरत है? लेकिन सच यह है कि तुम्हें नहीं याद है कि तुम हो।
यह विधि बहुत संभावना से भरी है। जब चल रहे हो तो याद रखो कि मैं हूं। चलना जारी रहे, चलते रहो; लेकिन निरंतर इस आत्म—स्मरण से जुड़े रहो कि मैं हूं? मैं हूं। इसे भूलो मत। तुम अभी मुझे सुन रहे हो, यहीं प्रयोग भी करो। तुम मुझे सुनते हो; उसमें बहुत डूबो मत, उससे तादात्म्य मत करो। जो भी मैं कहता हूं, उसे सुनने के साथ—साथ अपने को याद रखो, भूलो मत। सुनना रहे, शब्द रहें, कोई बोल रहा है और तुम हो—यानी यह स्मरण कि मैं हूं मैं हूं मैं हूं। इस ‘मैं हूं को बोध का स्थाई अंग बन जाने दो।
यह बहुत कठिन है। पूरे एक मिनट के लिए भी तुम यह लगातार स्मरण नहीं रख सकते। एक प्रयोग करो। अपने सामने घड़ी रख लो और सेकेंड की सुई को देखना शुरू करो। एक सेकेंड, दो सेकेंड, तीन सेकेंड—उसे देखते जाओ। दो काम एक साथ करो—सेकेंड बताने वाली सुई को देखो और निरंतर स्मरण करो, मैं हूं मैं हूं। प्रत्येक सेकेंड के साथ स्मरण रखो कि मैं हूं। पांच या छह सेकेंड के अंदर तुम देखोगे कि तुम भूल बैठे। अचानक तुम्हें याद आएगा कि कई सेकेंड गुजर गए और नहीं स्मरण किया कि मैं हूं।
पूरे एक मिनट भी स्मरण रखना चमत्कार है। और अगर तुम एक मिनट तक याद रख सके तो यह विधि तुम्हारी है। तब इसका प्रयोग करो। इसके द्वारा तुम सपनों का अतिक्रमण कर जाओगे और जानोगे कि सपने सपने हैं।
यह कैसे काम करती है? अगर तुम पूरे दिन याद रख सको कि मैं हूं तो यह स्मरण तुम्हारी नींद में भी प्रवेश कर जाएगा और तब तुम सपने में भी निरंतर याद रखोगे कि मैं हूं। और अगर सपने में याद रख सके कि मैं हूं तो सपना सपना ही हो जाएगा। तब सपना तुम्हें धोखा नहीं दे सकता है। तब स्वप्न यथार्थ की तरह नहीं प्रतीत हो सकता। यह इसकी तरकीब है, स्वप्न यथार्थ मालूम पड़ता है, क्योंकि तुम्हें आत्म—स्मरण नहीं रहा, तुम भूल गए कि मैं हूं। अपना स्मरण न रहने पर स्वप्न यथार्थ बन जाता है। और अगर अपना स्मरण रहे तो यथार्थ, तथाकथित यथार्थ महज स्वप्न बन जाता है।
स्वप्न और यथार्थ में यही भेद है। ध्यानपूर्ण मन के लिए या ध्यान के विज्ञान के लिए मात्र यही भेद है। यदि तुम हो तो समूचा यथार्थ स्‍वप्‍न मात्र है। और यदि तुम नहीं हो तो स्वप्न ही यथार्थ बन जाता है।
इसलिए पहले चरण में सतत स्मरण रखो कि मैं हूं। राम मत कहो, श्याम मत कहो; रूप का कोई नाम मत लो। क्योंकि तुम नाम नहीं हो। केवल कहो, मैं हूं। किसी भी क्रिया में इसका प्रयोग करो और तब अनुभव करो। अपने भीतर तुम जितने यथार्थ होते जाओगे, तुम्‍हारे चारों ओर का संसार उतना ही यथार्थहीन होता जाएगा। मैं वास्तविक होता जाएगा और संसार अवास्तविक होता जाएगा। या तो संसार वास्तविक है या मैं वास्तविक है—दोनों वास्तविक नहीं हो सकते। अभी तुम स्वप्‍नवत हो, तो संसार वास्तविक हो गया है। इस स्थिति को बदल दो। स्वयं वास्तविक हो जाओ, संसार स्वप्न हो जाता है।
गुरजिएफ इस विधि पर सतत काम करते रहे। उनके मुख्य शिष्य पी डी. ऑसपेंस्की ने उल्लेख किया है कि जब गुरजिएफ मेरे साथ इस विधि पर काम कर रहे थे और मैं तीन महीनों तक निरंतर ‘मैं हूं’ के स्मरण का अभ्यास कर रहा था तो तीन महीनों के बाद अचानक सब कुछ ठहर गया, विचार, सपने, सब कुछ बंद हो गए। मेरे भीतर केवल एक धुन शाश्वत संगीत की तरह बजती रही—मैं हूं, मैं हूं मैं हूं। और तब यह प्रयत्नपूर्ण कर्म नहीं था; मैं हूं का स्मरण एक सहज कर्म हो गया था।
तीन महीने तक ऑसपेंस्की को एक घर के अंदर रखा गया था, और उसे बाहर जाने की इजाजत नहीं थी। फिर एक दिन गुरजिएफ ने उसे बाहर बुलाया और कहा, मेरे साथ आओ। उस समय वे लोग रूसी नगर तिफलिस में रहते थे। गुरजिएफ ने उसको अपने साथ लिया और दोनों सड़क पर आ गए। ऑसपेंस्की अपनी डायरी में लिखता है, ‘पहली बार मैंने समझा कि उनका क्या अभिप्राय था जब जीसस ने कहां कि मनुष्य सोया हुआ है। मुझे लगा कि समूचा नगर ही सोया हुआ है। लोग नींद में ही चल रहे थे, दुकानदार नींद में ही सामान बेच रहे थे, खरीददार भी नींद में ही खरीद रहे थे। पूरा नगर सोया था। फिर मैंने गुरजिएफ की तरफ देखा, केवल वे ही जागे हुए थे। सारा नगर नींद में था। नींद में ही लोग क्रोध कर रहे थे, लड़ रहे थे, प्रेम कर रहे थे, खरीद—फरोख्त कर रहे थे; सब कुछ नींद में कर रहे थे।’
फिर ऑसपेंस्की लिखता है, ‘अब मैं उनकी आंखों को, उनके चेहरों को देखता था; वे बिलकुल बेखबर थे। वे वहां नहीं थे। उनका आंतरिक केंद्र खो गया था, वह वहां नहीं था।’ ऑसपेंस्की ने गुरजिएफ से कहां, मैं और आगे नहीं जाना चाहता हूं। इस नगर को क्या हो गया है? हर कोई नींद में, नशे में मालूम पड़ता है।
गुरजिएफ ने कहा, नगर को कुछ नहीं हुआ है, तुमको अवश्य कुछ हुआ है। तुम नशे से बाहर आ गए हो। नगर तो वही का वही है। यह वही जगह है जहां तीन महीने पहले तुम घूमते थे, लेकिन तब तुम नहीं देख सकते थे कि लोग सोए हैं, क्योंकि तुम भी सोए थे। अब तुम देख सकते हो, क्योंकि अब बोध का कुछ गुण तुममें आया हुआ है। तीन महीने तक लगातार ‘मैं हूं' का अभ्यास करने से तुम थोड़ी मात्रा में जागरूक हो गए हो, तुम बोधपूर्ण हो गए हो। तुम्हारी चेतना का एक अंश स्वप्न के परे चला गया है। यही कारण है कि तुम्हें अब हर कोई नींद में, मृतवत चलता दिखाई पड़ता है, नशे में, सम्मोहन में मालूम पड़ता है।
ऑसपेंस्की लिखता है, मैं उस दृश्य को बर्दाश्त नहीं कर सकता था कि सब नींद में हों। वे जो भी कर रहे थे, उसके लिए वे जवाबदेह नहीं थे। बिलकुल नहीं। वे कैसे जवाबदेह हो सकते हैं? वह लौटकर आया और गुरजिएफ से उसने कहां, यह क्या है? क्या मैं धोखे में तो नहीं पड़ा हूं? क्या आपने कुछ किया है कि मुझे सारा नगर नींद में दिखाई पड़ता है? मुझे अपनी आंखों पर ही विश्‍वास नहीं होता है।
लेकिन यह किसी को भी घट सकता है। अगर तुम स्वयं को स्मरण रख सके तो तुम जानोगे कि कैसे लोग अपने को याद नहीं रखते और कैसे वे विस्मरण में, नींद में ही सब गति करते हैं। सारा संसार ही सोया है।
लेकिन जब जागे हुए हो तब शुरू करना। जिस क्षण याद आए उसी क्षण स्मरण का धागा पकड़ लेना कि मैं हूं। मैं नहीं कहता कि इन शब्दों को, ‘मैं हूं, को दोहराओ। नहीं, उसका भाव करो। नहाते हुए अनुभव करो कि मैं हूं। ठंडे पानी का स्पर्श होने दो और उसके पीछे तुम स्वयं खड़े रहकर उसकी अनुभूति करो और स्मरण करो कि मैं हूं। याद भर रखना है। यह मैं नहीं कहता कि तुम 'मैं हूं' का जाप करो। जाप कर सकते हो, लेकिन उससे बोध की उपलब्धि नहीं होगी। उलटे जाप से नींद ही बढ़ सकती है।
अनेक लोग हैं जो अनेक चीजों का जाप कर रहे हैं। वे राम—राम कहे जाते हैं। अगर वे बोध के बिना महज जप करते हैं तो यह राम—राम भी एक नशा बन जाता है। इसके जरिए वे ठीक से सो सकते हैं। यही कारण है कि पश्चिम में महेश योगी का इतना प्रभाव है। वे मंत्र जपने को देते हैं। और पश्चिम में नींद गंभीर समस्या का रूप ले रही है। वहां नींद की बहुत कमी हो गई है। स्वाभाविक नींद तो गायब ही हो गई है। तुम केवल ट्रैंक्येलाइजर की मदद से सो पाते हो, अन्यथा सोना असंभव हो गया है। महेश योगी के प्रभाव का यही कारण है। अगर तुम किसी भी शब्द को दोहराते रहो तो नींद गहरा जाएगी, बस।
इसलिए तथाकथित टी. एम., भावातीत ध्यान एक मानसिक ट्रैंक्येलाइजर है, और कुछ भी नहीं है। उससे मदद मिलती है। लेकिन वह सोने के लिए तो काम की चीज है, ध्यान के बिलकुल काम की नहीं है। उससे तुम अच्छी तरह सो सकते हो। तुम्हारी नींद गहरी होगी। अच्छा है, लेकिन वह ध्यान कतई नहीं है।
अगर तुम एक शब्द को निरंतर दोहराते रहो तो उससे ऊब पैदा होती है। और ऊब नींद लाने में कारगर है। इसलिए ऊब पैदा करने वाली कोई भी चीज नींद में सहायक है। मां के गर्भ में पड़ा बच्चा लगातार नौ महीने सोया रहता है, और उसका कारण तुम शायद नहीं जानते हो। उसका कारण मात्र मां के हृदय की धड़कन है। यह धड़कन निरंतर जारी है। वह संसार की एक अत्यंत उबाने वाली चीज है। सतत चालू रहने वाली इस आवाज के नीचे बच्चा सोया रहता है।
यही कारण है कि जन्म के बाद भी जब बच्चा बहुत रोता—चीखता है तो मां अपनी छाती के पास उसके सिर को ले जाती है और बच्चा फिर अचानक शांत होकर सो जाता है। फिर धड़कन काम कर गई। बच्चा मानो गर्भ का अंश बन गया। और यही कारण है कि तुम्हारे बड़े होने पर भी जब तुम्हारी पत्नी या प्रेमिका तुम्हारे सिर को अपनी छाती पर रख लेती है तो तुम नींद में उतरने लगते हो। यहां भी वही धड़कन काम करती है।
मनस्विद कहते हैं कि जब तुम न सो सको तो दीवार—घड़ी पर मन को लगाओ, उस घड़ी की टिक—टिक की आवाज पर मन को एकाग्र करो। वह आवाज भी हृदय की धड़कन जैसी ही है, उससे तुम्हें नींद लग जाएगी। कुछ भी दोहराने से काम चल जाएगा।
इसलिए यह मैं हूं या मैं हूं का स्मरण कोई मंत्र नहीं है, उसका शाब्दिक उच्चार नहीं करना है। उसका बस भाव करो, उसे अनुभव करो, अपने अस्तित्व के प्रति संवेदनशील होओ। जब तुम किसी का हाथ स्पर्श करो तो उसका हाथ ही मत छुओ, उसके साथ अपने छूने को भी अनुभव करो। और इस अनुभव को, इस संवेदनशीलता को अपने मन में गहरे से गहरा उतरने दो, प्रवेश करने दो। 
एक दिन तुम अचानक अपने केंद्र पर जाग जाओगे, और पहली बार केंद्र से संचालित होने लगोगे। और तब सारा संसार एक स्वप्न बन जाएगा। और तब तुम जानोगे कि स्‍वप्‍न देखना सच ही स्‍वप्‍न देखना था। और जब जानोगे कि सपना देखना सपना देखना था, तब सपना समाप्त हो जाएगा। वह तो तभी तक जारी रहता है जब तक हम उसे यथार्थ मानते हैं। उसे अयथार्थ जानते ही वह समाप्त हो जाता है।
और एक बार सपना गया कि तुम दूसरे आदमी हो गए। पुराना आदमी मर गया, सोया आदमी चल बसा। जो आदमी तुम पहले थे, अब वही न रहे। पहली बार तुम बोधपूर्ण हुए, सजग हुए। पहली बार इस नींद से भरी दुनिया में तुम जाग्रत हुए। तुम बुद्ध हुए।
और इस जागरण के साथ दुख समाप्त हो जाता है। इस बोध के बाद मृत्यु विदा हो जाती है। इस जागरण के द्वारा भय जाता रहता है। तुम पहली बार सब से—दुख, भय और मृत्यु से मुक्त हो जाते हो। तुम स्वतंत्रता को उपलब्ध हुए। घृणा, क्रोध, लोभ सब विदा हो जाते हैं। तुम प्रेम ही हो जाते हो, प्रेमपूर्ण नहीं, प्रेम ही हो जाते हो। 

- *ओशो* 
🌺🌸🍁🌹🌻🌺

Thursday, 28 January 2021

😊 દીદી ! ફરીથી કોરોના વાઇરસ આવે ત્યારે?😘🙆

  
        - सबसे रोचक जानकारी बच्चों से मिलती है, क्योंकि वे सबकुछ बता देते है जो वे जानते है और फिर चूप हो जाते है। 
            - मार्क ट्वेन 
     

વેણુ દીદી  ! 😘એક વાત કહું? 😊

" છે ને ! અમે lion 🦁 જોવા ગયા હતા. રાતે lion જોયો. બહું જ ઠંડી હતી. હું, મમ્મી એને પાપા ગયા હતા. અને મોટી મમ્મી! 😘 પપ્પા એ તમને lion ના ફોટા અને વીડિયો મોકલ્યા' તા ? મેં પપ્પા ને કહ્યું હતું, કે મોટી મમ્મીને ફોટા મોકલો. અને જો વેણુ દીદી ! અમે છે ને, મોટી ગાડી માં ગયા હતાં. ત્યાં છે ને! રોનક કાકાની સ્વરા પણ આવી હતી. તે બહું નાની હતી. આખો દિવસ રમ રમ કરતી હતી." 
          એકધારું બોલ્યા પછી થાક્યો જ નહીં. જૈનીલ ને બોલતો અટકાવી વેણુ એ તેને  જમવાનુ પૂછ્યું . જૈનીલે ત્રણ વખત જમ્યો છું તેમ જણાવી, તેની પ્રવાસ ની વાતો  આગળ વધારી. સતત એક કલાક થી બોલતો હતો. Lion જોઈને ખૂબ જ ખૂશ હતો.

         થોડીવાર પછી તેની મમ્મી નો કૉલ આવ્યો. જેનીલે મમ્મીને વાત પૂરી કરી આવુ છું, તેમ જણાવી તેની આગળ ની વાત  શરુ કરી દીધી. સતત એકધારું બોલતાં, અમને એમ થયુ કે પાણી આપીએ. પણ તેને પાણી પણ નોતું પીવું.
      તો અમને એમ થયું કે, ખૂબ બોલી બોલી ને થાકી જશે ગયો છે, માટે લાવો થોડી પ્રશ્નોત્તરી કરીએ. તો તેને રાહત રહે.
          તો,,,, 
ક્યારે પાછા આવ્યા?
ત્યાં શું જમ્યા?
તું સ્વરા સાથે રમતો હતો? કે તેને મારતો હતો?
અમને યાદ કરતો હતો?
અમારા માટે શું લાવ્યો?
ઠંડી લાગતી હતી?
Lion ને જોઇને ડર લાગતો હતો?
Lion કેવો હતો?
Lion શું કરતો હતો?
Lion ને તે શું ખાવાનું આપ્યું?


      🙆 અમને કેમ ના લઈ ગયો? 😘

આ પ્રશ્ન પૂછતાં જ જૈનીલે કહ્યું, " દીદી તમારે રજા નહોતી માટે. "

   દીદી !  તમારે રજા નાં દિવસે હું તમને સફારી ગાડી માં બેસાડીને લઇ જઇશ.

       વાત ને આગળ વધારતા વેણુએ પૂછયુ, ' હવે તો હું બેંગલોર જઈશ ! પછી ક્યારે?' 

               તરત જ જૈનીલ બોલી ઉઠ્યો : " હવે ફરી કોરોના વાઇરસ આવશે ત્યારે તમે આવશો ને! ?????????     🙆🙆😁😁😁🤔  ત્યારે તમને લઇ જઇશ. ચોક્કસ . "   

     😁અને સૌ ખડ ખડખડાટ હસી પડ્યા. 😁 
         સાથે જૈનીલ પણ !!!
       
We worry about what a child will become tomorrow,yet we forget that he is some one today.
         

world peace education

19/2/2021 : peace 🕊️ education.